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एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम क्या है || What is Endoplasmic Reticulum in hindi


इस पोस्ट में एण्डोप्लामिक रेटीकुलम की उत्पत्ति ,संरचना  तथा ये कितने प्रकार की होती हैं, कार्यों का वर्णन,एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम में पाये जाने वाले इन्जाइम्स कौन से होते हैं? के बारे में जानेंगे-



एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम
(Endoplasmic Reticulum)

इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप की सहायता से देखने पर साइटोप्लाज्मिक मैट्रिक्स में फैली हुई नलिकाओं की एक प्रणाली दिखाई देती है जो रिक्तिकाओं या गुहाओं के साथ मिलकर एक जाल सा बनाती है तथा रिक्तिकाएँ आपस में एक-दूसरे से जुड़ी हुई झिल्लियों का जाल सा बनाती हैं। 

उत्पत्ति (Occurrence) - एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम की उत्पत्ति भिन्न-भिन्न कोशिकाओं में अलग-अलग प्रकार से होती हैं। भ्रूणीय कोशिका तथा अण्डे में एण्डोप्लामिक रेटीकुलम का अभाव होता है। शुक्राणु कोशिका में यह अल्प विकसित होती है जबकि ऐडिपोस उतकों (Adipose tissue), एड्रीनोकार्टिकल कोशिकाओं में भूरी तथा चपटी होती है। कुछ कोशिकाओं में कणिकाविहीन एण्डोप्लामिक रेटीकुलम पाया जाता है। अन्तःस्रावी ग्रन्थियों तथा आमाशय में एण्डोप्लामिक रेटीकुलम पूर्ण विकसित तथा कणिकायुक्त होती है क्योंकि इसकी बाह्य सतह पर राइबोसोम्स पाये जाते हैं जो प्रोटीन्स को संश्लेषण करते हैं। यकृत कोशिकाओं में कणिका विहीन तथा कणिकायुक्त (राइबोसोम्स) एण्डोप्लामिक रेटीकुलम पाया जाता है।

बाह्य संरचना 
(Morphology)

एण्डोप्लामिक रेटीकुलम की रचना बाह्य रूप से निम्न तीन प्रकार की संरचनाओं से मिलकर बनता

उत्तर-

1. सिस्टर्नी (Cistermae)

2. वेसीकल्स (Vesicles)

3. नलिकाएँ (Tubules)





1. सिस्टी (Cisternae)- ये लम्बी, चपटी तथा कोष के समान शाखविहीन नलिकाएँ हैं इन नलिकाओं का व्यास 40 से 50mg होता है। सिस्टर्नी समानान्तर क्रम में व्यवस्थिता होती हैं तथा एक के ऊपर एक क्रम में व्यवस्थित होकर एक बण्डल बनाती हैं तथा केन्द्रक को चारों तरफ से घेरती है।

2. वेसीकल्स (Vesicles) - यह वृत्ताकार या अण्डाकार रचनाएँ हैं। जिनका व्यास 25 से 500my तक होता है इसी प्रकार के वेसीकल्स कोशाद्रव्य तथा अग्रशायिक कोशिकाओं में मुख्य रूप से पाये जाते हैं।

3. नलिकाएँ (Tubules) - यह विसरित हुई संरचनाएँ हैं जो अनियमित रूप से फैली होती हैं तथा अशाखित रूप से फैली होती हैं। इन नलिकाओं का व्यास 50 से 100mu तक होता है। यह नलिकाएँ मुख्य रूप से रेटिना की रंजक ऐपीथीलियम कोशिकाओं तथा स्टोरॉयड्स यौगिकों (कोलेस्ट्राल तथा ग्लीसरायड) आदि के संश्लेषण में सहायक होती हैं। इसके अतिरिक्त यह रैटिना की बड़ी वर्णक कोशिकाओं में भी पायी जाती हैं। जिनके कारण विटामिन A का उपापचय होता है।


एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम के प्रकार
(Types of Endoplasmic Reticulum)

राइबोसोम्स की उपस्थित तथा अनुपस्थित के आधार पर एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम (ER) दो प्रकार के होते हैं

1. कणिकाविहीन एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम (Agranular endoplasmic reticulum)- इस प्रकार के EPR में राइबोसोम्स नहीं पाये जाते हैं इसीलिए इनकी बाह्य सतह चिकनी होती है। यह मुख्य रूप से नलिकीय रूप में पाये जाते हैं। समस्त नलिकाएँ आपस में मिलकर एक अनियमित रचना बनाती हैं। इस प्रकार के एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम, सेबेसियस ग्रन्थि (Sebaceous glands) एडीनल ग्रन्थि तथा जनन कोशिकाओं में पाया जाता है जहाँ पर लिपिड का संश्लेषण होता है।

2. कणिकायुक्त एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम (Granular or rough endoplasmic reticulum)- इस प्रकार के एण्डोप्लाज्मिक की सतह पर राइबोसोम्स पाये जाते हैं इसीलिए इन्हें रूखा एण्डोप्लाधिक रेटीकुलम कहते हैं। जिन कोशिकाओं में वृद्धि तथा विभेदन होता है उन कोशिकाओं में इस प्रकार का EPR पाया जाता है। कणिकायुक्त रेटीकुलम का सम्बन्ध तत्वों के पृथकरण (segregation of substances) तथा स्रावित पदार्थों के निर्माण से होता है जिसके कारण कोशिकाओं की वृद्धि व विभेदन होता है। इस प्रकार का EPR अग्नाशयिक कोशाओं, प्लाज्मा कोशाओं, यकृत कोशिकाओं तथा गोब्लेट (Goblet) कोशिकाओं में पाया जाता है जहाँ पर प्रोटीन्स का संश्लेषण होता है।

अग्नाशय की एक्सोक्राइन ग्रन्थि (Exocrine gland) में कणिका युक्त रेटीकुलम जालिकावत् झिल्ली तथा आधारीय सिस्टर्नी से मिलकर बनता है। कोशिका के शीर्ष भाग में कणिकायुक्त एण्डोप्लामिक रेटीकुलम वेसीकल्स के रूप में पाया जाता है। इसी प्रकार का अन्य दूसरा विशेष कणिकायुक्त EPR, एण्डोप्लामिक नेबेनकर्न (Endoplasmic nebenkern) कहलाता है जिसका निर्माण जालिका युक्त झिल्लियों के द्वारा होता है। जो आपस में मिलकर गोलाकार आकृति बनाती है।


एण्डोप्लाज्मिक झिल्ली में पाये जाने वाले विभिन्न एन्जाइम्स
(Various enzymes of the endoplasmic membrane)

एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम में पाये जाने वाले एन्जाइम्स अत्यन्त महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि यह निम्न कार्यों को सम्पन्न करते हैं।

1. प्लाज्मैलोजेन्स का उपापचय करते हैं।

2. दसीय अम्लों का संश्लेषण

3. ग्लीसरॉयड्स का संश्लेषण

4. स्टीरॉयड्स का संश्लेषण

5.L-एस्कार्बिक अम्ल का संश्लेषण

6. UDP- यूरियॉनिक अम्ल का उपापचय

7. UDP- ग्लूकोज डिफास्फोराइलेशन में सहायक

8. ऐरिल तथा स्टीरॉयड का संश्लेषण


एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम के कार्य
(Functions of Endoplasmic reticulum)

एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम कोशिका के लिए स्रावण, संचय, परिसंचरण तथा तंत्रिका तंत्र जैसी महत्वपूर्ण क्रियाओं को सम्पन्न करता है, अर्थात् इसके निम्नलिखित कार्य हैं

1. एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम की झिल्लियों के द्वारा परासरण, विसरण तथा सक्रिय स्थानान्तरण (Active transport) जैसी महत्वपूर्ण क्रियायें पूर्ण होती हैं।

2. एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम कोशिका में परासंरचनात्मक कंकालीय आधार बनाता है। इसके अतिरिक्त यह कोलायडल साइप्लोज्मिक मैट्रिक्स को यांत्रिक सहारा भी प्रदान करता है।

3. एण्डोप्लामिक रेटीकुलम परिसंचरण तथा स्तानान्तरण जैसी महत्वपूर्ण क्रियाओं को संचालित करता है जिसमें स्रावित पदार्थ निम्न परिपथ के द्वारा विभिन्न कोशिकांगों में परिभ्रमण करते हैं कणिकामय (ER) -----> कणिकाविहीन (ER)- ----> गाल्जी झिल्ली लाइसोसोम्स या स्रावण कणिकाओं में।

4. एण्डोप्लामिक रेटीकुलम में पाये जाने वाले अनेक एन्जाइम्स कोशिका में संश्लेषण तथा उपापचयी क्रियाओं को सम्पन्न करते हैं। एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम विभिन्न एन्जाइम्स की विभिन्न क्रियाओं के लिए क्रिया क्षेत्र बनाते हैं।

5. एण्डोप्लामिक झिल्ली के कारण अन्तरा कोशिकीय विस्पन्द (Intra-Cellular impulses) होता है। जैसे एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम के कारण प्लाज्मा झिल्ली की सतह से नाड़ी स्पन्दन पेशीय तन्तु के द्वारा होती है ।

6.डी टाक्साफिकेशन (Detoxification) की प्रक्रिया के द्वारा एण्डोप्लाजिमक रेटीकुलम 

कोशिका को विभिन्न तत्वों के द्वारा निर्मित विषैले प्रभाव से बचाती है। जोन्स (Jones) तथा फासेट (Fawcett) ने बताया कि अगर किसी जन्तु कोशिका में विषैला पदार्थ जैसे फीनोबाक्सीबिटा- (Phenoboxibital) इन्जेक्ट किया जाता है तो एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम में पाया जाने वाला एन्जाइम NADPH2 सक्रिय हो जाता है तथा विषैले प्रभाव से बचाता है।

7. प्रत्येक कोशिका विभाजन के पश्चात् एण्डोप्जाज्मिक रेटीकुलम की झिल्ली, नयी केन्द्रकीय झिल्ल (Nuclear envelope) का निर्माण करती है।

8. कणिकामय एण्डोप्लामिक रेटीकुलम की बाह्य सतह पर राइबोसोम्स चिपके हुए पाये जाते हैं राइबोसोम्स नयी प्रोटीन्स का संश्लेषण करते हैं। इस प्रकार राइबोसोम्स बाह्य या आन्तरिक कोशिकीय अंग के द्वारा प्रोटीन्स का संश्लेषण करते हैं। उदाहरण के लिए कुछ कोशिकाओं में पाये जाने वाले राइबोसोम्स, हीमोग्लोबिन तथा तन्तु का संश्लेषण करते हैं तथा संश्लेषित पदार्थ को कोशा द्रव में संचित करते हैं। राइबोसोम्स कुछ प्रोटीन्स जैसे ट्रोफोकोलैजेन सीरम, प्रोटीन्स तथा एन्जाइम युक्त प्रोटीन्स का संश्लेषण बाह्य कोशिकीय स्थानान्तरण (Extra-cellular export) के लिए करते हैं। ये प्रोटीन्स एण्डोप्लामिक रेटीकुलम के द्वारा, गाल्जीकाय काम्प्लेक्स कणिकाओं के द्वारा स्रावित होकर बाहर आ जाते हैं।


Conclusion-

इस पोस्ट में हमने एण्डोप्लामिक रेटीकुलम की उत्पत्ति ,संरचना  तथा ये कितने प्रकार की होती हैं, कार्यों का वर्णन,एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम में पाये जाने वाले इन्जाइम्स कौन से होते हैं? के बारे में जाना-

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