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केन्द्रक क्या है || what is the nucleus in hindi

 

इस पोस्ट मे हम

केन्द्रक की रासायनिक संरचना का वर्णन 

 केन्द्रक के विभिन्न कार्यों का वर्णन

के बारे में जानेंगे




केन्द्रक 
(Nucleus)
केन्द्रक (Nucleus = Latin word; Nux=nut) कोशिका का एक महत्वपूर्ण अंगक है जो कोशिका की समस्त उपापचयी क्रियाओं को नियंत्रित करता है इसमें अनुवांशिक तत्व DNA पाया जाता है केन्द्रक को राईट ब्राउन ने 1831 में देखा तथा उसके प्रमुख घटकों का अध्ययन किया और बताया कि यह अत्यन्त महत्वपूर्ण कोशिकांग है क्योंकि यह कोशीय उपापचय (Cellular Metabolism) सहायक होता है तथा उसके साथ ही साथ आनुवांशिक क्रियाओं को भी नियंत्रित करता है।

प्राप्ति स्थान (Occurrence) - पादपों तथा जन्तुओं की समस्त यूकैरियोटिक कोशिकाओं में केन्द्रक पाया जाता है। लेकिन कुछ यूकैरियोटिक कोशिकाओं जैसे स्तनधारियों की ऐरिथ्रोसाइट्स आदि में केन्द्रक अनुपस्थिता भी होता है। क्योंकि इन कोशिकाओं में न्यूक्लियाई (Nuclei) वर्धन की प्रारम्भिक अवस्थाओं में पाये जाते हैं। जीवाणुओं, विषाणुओं तथा नीली हरी शैवाल में सुसंगठित केन्द्रक नहीं पाया जाता है तथा उसमें केन्द्रक झिल्ली का भी अभाव होता है। केन्द्रक की उत्पत्ति तथा विकास की अवस्था के आधार पर वैज्ञानिकों ने जीवों में पायी जाने वाली कोशिकाओं को दो समूहों में विभाजित किया

(i) प्रोकैरियोटिक (Prokaryotics)

(ii) यूकैरियोटिक (Eukaryotics)

प्रोकैरियोटिक जीवों में पायी जाने वाली कोशिकाओं में सुविकसित केन्द्रक (True Nucleus) नहीं होता है। इन कोशिकाओं में एकल तथा वर्तुल (Circular) आद्य होता है। जिसके अन्दर DNA अणु होता है। DNA कोशाद्रव्य के सम्पर्क में होता है। जबकि यूकैरियोटिक कोशिका में केन्द्रक सुविकसित होता है तथा केन्द्रकीय झिल्ली पायी जाती है। जिससे अन्दर कोशाद्रव भरा होता है जिसमे है केन्द्रकीय क्रोमैटिन पाया जाता है।


केन्द्रक की परा-संरचना 
(Ultra-Structure of Nucleus)

अन्तरा अवस्था में पाये जाने वाले सुविकसित केन्द्रक के निम्नलिखित भाग होते हैं  
1. केन्द्रक कला (Nuclear Membrane or Nucleolemma)
2. केन्द्रक का द्रव्य (Nucleoplasm or Nuclear sap)
3. क्रोमैटिन धागे (Chromatin fibers or Chromatin Network) )
4. केन्द्रिका (Nucleolus)

1. केन्द्रकीय झिल्ली (Nuclear Membrane)- केन्द्रक, कोशाद्रव्य से एक झिल्ली के द्वारा पृथक होता है जिसे कैरियोथीका या केन्द्रक झिल्ली कहते हैं। यह पारगम्य तथा रक्षक झिल्ली है जिसके द्वारा केन्द्रक तथा कोशाद्रव्य के बीच में पदार्थों का स्थानान्तरण होता है। इसे कैरियोथीका भी कहते हैं यह एक बाह्य रक्षात्मक झिल्ली है जिसके द्वारा केन्द्रक, कोशा द्रव से पृथक होता है। इस प्रकार केन्द्रकीय झिल्ली की सहायता से केन्द्रकीय-कोशाद्रवीय एक्सचेंज (Nucleo-cytoplasmic exchange) होता है तथा जीन क्रियाएँ (Gene action) पूर्ण होती है तथा कोशाद्रवीय क्रियाएँ भी नियंत्रित होती हैं। कोशा विभाजन के समय केन्द्रकीय झिल्ली, एण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम से सीधे सम्बन्धित होती है अर्थात् केन्द्रकीय झिल्ली एण्डोप्लामिक रेटीकुलम के द्वारा विकसित होती है। सूत्री विभाजन के समय अन्तरावस्था (Telophase) में एण्डोप्लामिक रेटीकुलम की सिस्टर्नी गुणसूत्रों के चारों तरफ कुण्डलित हो जाती है तथा आपस में जुड़कर केन्द्रकीय झिल्ली का निर्माण करती है। इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप की सहायता से केन्द्रकीय झिल्ली का अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि यह झिल्ली दोहरी भित्ति से निर्मित होती है तथा इसमें निश्चित दूरी के पश्चात असंख्य छिद्र होते हैं। बाह्य झिल्ली को एक्टोकैरियोथीका (Ectokaryotheca) कहते हैं जबकि आंतरिक झिल्ली, एण्डोकैरियोथीका (Endokaryotheca) कहलाती है इसकी बाह्य सतह खुरदरी होती है क्योंकि इस पर RNA कण चिपकी हुई अवस्था में पाये जाते हैं। जबकि आंतरिक सतह चिकनी होती है और इस पर राइबोसोम्स अनुपस्थित होते हैं।




चित्र प्रारूपी इंटरफेज केन्द्रक की संरचना
केन्द्रकीय झिल्ली पर असंख्य सूक्ष्म छिद्र होते हैं जिन्हें केन्द्रकीय छिद्र (Nuclear pore) कहते हैं। केन्द्रकीय झिल्ली के द्वारा केवल सूक्ष्म आयन्स जैसे CI-, Na तथा K* आदि ही अन्दर आ सकते हैं। दूसरे शब्दों में बड़ी संरचनाएँ जैसे राइबोसोमल सब इकाइयाँ केन्द्रिका के अन्दर इकट्ठी हो जाती है। केन्द्रकीय छिद्र काम्प्लेक्स की सहायता से केन्द्रक को छोड़ देती है। कैरियोथीका वाली यूनिट झिल्ली
की संरचना प्रोटीन्स तथा लिपिड से होती है। 

इस प्रकार केन्द्रकीय झिल्ली पदार्थों के आवागमन में महत्वपूर्ण भाग लेती है तथा इसके द्वारा -
1. सूक्ष्म आयन्स तथा अणु आसानी से आर-पार आ जा सकते हैं।
2. बड़े अणु तथा सूक्ष्म कण पहले वेसीकल्स का निर्माण करते हैं उसके पश्चात केन्द्रकीय झिल्ली
के द्वारा साइटोसॉल में पहुंचते हैं।
3. केन्द्रकीय झिल्ली में पाये जाने वाले कुछ तत्व, केन्द्रकीय छिद्र के द्वारा अन्दर पहुँचते हैं।
4. कभी-कभी केन्द्रकीय झिल्ली का कुछ भाग टूट जाता है तथा कोशाद्रव्य में घुल जाता है।

2. केन्द्रक द्रव (Nucleoplasm or Nuclear sap)- केन्द्रकीय झिल्ली तथा केन्द्रिका के मध्य में एक तरल पदार्थ भरा होता है जो पारदर्शी, कणिकामय, अर्ध ठोस तथा ऐसिडोफिलिक (acidophilic) आधारीय तत्व के रूप में होता है जिसे मैट्रिक्स या कैरियोलिम्फ भी कहते हैं। केन्द्रकीय तत्व जैसे क्रोमैटिन धागे तथा केन्द्रिका चारों तरफ से केन्द्रकीय द्रव्य के द्वारा घिरे रहते हैं।

केन्द्रक द्रव रासायनिक रूप से न्यूक्लियो प्रोटीन्स के द्वारा निर्मित होता है लेकिन इसमें अनेक अकार्बनिक तथा कार्बनिक तत्व भी पाये जाते हैं जो प्रोटीन्स, एन्जाइम्स लवणों तथा न्यूक्लिक अम्ल के रूप में होते हैं। यह पदार्थ निम्न हैं

(A) न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acid) - न्यूक्लियोप्लाज्म में प्रमुख न्यूक्लिक अम्ल DNA तथा RNA के रूप में पाये जाते हैं। DNA तथा RNA में गुरु आण्विक अवस्था (Macro-molecular
stage) होती है।




(B) प्रोटीन्स (Proteins) - न्यूक्लियोप्लाज्म में अनेक प्रकार के काम्प्लेक्स प्रोटीन्स होते हैं। जिन्हें संयुक्त रूप से न्यूक्लियो प्रोटीन्स कहते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं

(i) क्षारीय प्रोटीन्स (Basic Proteins)- वह प्रोटीन्स जिनमें क्षारीय स्टेन होता है, बेसिक प्रोटीन्स कहलाते हैं। न्यूक्लियोप्रोटेमाइन्स तथा न्यूक्लियो हिस्टोन्स मुख्य क्षारीय प्रोटीन्स हैं।

न्यूक्लियोप्रोटेमाइन्स सरल आधारीय प्रोटीन्स है जिनका आण्विक भार बहुत कम होता है। उदा. आरगेनाइन (Arganine)। प्रोटेमाइन्स सामान्य रूप से DNA अणु के द्वारा घिरे रहते हैं।

हिस्टोन्स का निर्माण कुछ आधारीय अमीनों अम्लों जैसे लाइसिन, हिस्टीडिन, आरगीनाइन आदि से होता है। हिस्टोन प्रोटीन्स, DNA से सम्बन्धित होते हैं तथा अधिकांश जीवों के न्यूक्लियाई में पाये जाते हैं।

(ii) अम्लीय प्रोटीन्स (Acidic-Proteins) - इन्हें नॉन हिस्टोन प्रोटीन्स भी कहते हैं। यह न्यूक्लियोप्लाज्म अथवा क्रोमैटिन में पाये जाते है। फास्फोप्रोटीन्स (Phosphoproteins) मुख्य अम्लीय प्रोटीन्स हैं जो यूक्रोमैटिन में पाये जाते हैं।

(C) लिपिड्स (Lipids) - स्टोनबर्ग (Stone berg) ने 1937 में तथा डाउन्स (Dounce) ने 1955 में बताया कि न्यूक्लियोप्लाज्म में अल्प मात्रा में लिपिड भी पाया जाता है।

(D) एन्जाइम्स (Enzymes)- केन्द्रक द्रव में अनेक एन्जाइम्स पाये जाते हैं यह एन्जाइम्स DNA, तथा RNA के संश्लेषण के लिये अनिवार्य होते हैं। इनमें से अधिकांश केन्द्रकीय एन्जाइम्स अम्लीय प्रोटीन्स के द्वारा निर्मित होते हैं।

(E) लवण (Minerals) - केन्द्रक रस में अनेक अकार्बनिक तत्व जैसे पोटेशियम (K) सोडियम (Na) कैल्शियम (Ca) फास्फोरस (P) तथा मैग्नीशियम (Mg) आदि पाये जाते हैं। केन्द्रक द्रव में अनेक एन्जाइमैटिक क्रियायें होती हैं क्योंकि इसमें अनेक एन्जाइम्स घुलित अवस्था में पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त केन्द्रक द्रव कोशा विभाजन के समय स्पिंडल तन्तुओं का निर्माण करता है।

3. क्रोमैटिन तन्तु (Chromatin fibers) - केन्द्रक द्रव्य में असंख्य धागे के समान कुण्डलित संरचनाएँ पायी जाती हैं जिसे क्रोमोनिमेटा कहते हैं जिनसे बाद में केन्द्रकीय जालिका (Nuclear reticulum) या क्रोमैटिन जालिका बनती है। क्रोमैटिन तन्तुओं का जाल एक्रोमैटिन पदार्थ से निर्मित होता है। क्रोमैटिन तन्तु रस्सी के समान कुण्डलित रचनायें होती हैं वो समान रूप से सम्पूर्ण कोशाद्रव में वितरित होते हैं। क्रोमैटिन पदार्थ दो प्रकार के होते है जिन्हें क्रमशः हेटरोक्रोमैटिन तथा यूक्रोमैटिन कहते हैं

(A) हेटरोक्रोमैटिन (Heterochromatin) -इण्टरफेज की अवस्था में क्रोमोसोम्स का क्रोमैटिन पदार्थ महीन तन्तुओं के रूप में सम्पूर्ण कोशा द्रव में फैल जाते हैं लेकिन कुछ स्थानों पर क्रोमैटिन पदार्थ सघन होकर गहरा स्टेन युक्त क्रोमैटिन मास (dark stained chromatin mass) बनाता है इस सघन क्षेत्र को हेटरोक्रोमैटिक क्षेत्र या हेटरोक्रोमैटिन कहते हैं। अर्थात् यह क्रोमैटिन का गहरा स्टेन युक्त सघन क्षेत्र है। केन्द्रक के इस सधन क्षेत्र को कैरियोसोम्स, क्रोमोसेन्टस्र या असत्य न्यूक्लियोलाई भी कहते हैं। हेटरो क्रोमैटिन केन्द्रिका के चारों तरफ एक परिधि में स्थित होते हैं। यह उपापयची तथा अनुवांशिक रूप से अक्रिय होते हैं क्योंकि इनमें DNA अल्प मात्रा में होता है जबकि RNA की मात्रा अधिक होती है।

(B) यूक्रोमैटिन (Euchromatin) यह क्रोमैटिन का हल्का स्टोन युक्त वितरित क्षेत्र है जिसमें हेटरो क्रोमैटिन की तुलना में अधिक मात्रा में DNA होता है। हेटरोक्रोमैटिन के निम्न कार्य हैं

1. अर्धसूत्री विभाजन के समय यह समजातगुण सूत्रों (Homologous Chromosomes) की जोड़ी बनाने के लिए आकर्षित करता है।

2. इनके कारण DNA का द्विगुणन तथा ट्रान्सक्रिप्सन (Transcription) होता है।

3. यूक्रोमैटिन के अन्दर हेटरोक्रोमैटिन कोष्ठक जीनोम (Genome) को विभिन्न टुकड़ों में विभक्त करते हैं।

4. यह क्रोमोसेन्टर (Chromocentre) के निर्माण में सहायक होते हैं।

5. सेन्ट्रोमेरिक हेटरोक्रोमैटिन कोशा विभाजन के समय गुणसूत्रों के विभाजन में सहायक होता है।

4. केन्द्रिका (Nucleolus)
केन्द्रिका की सर्वप्रथम फान्टाना ने (1781) में खोज की। केन्द्रक के मैट्रिक्स में एक सघन गोलाकार या अण्डाकार ऐसिडोफिलिक संरचना के रूप में पायी जाती है। कोशिका में केन्द्रिका की स्थित निश्चित होती है। केन्द्रिका का परिमाण कोशिका की संश्लेषित क्रियाओं पर निर्भर करता है। केन्द्रिका का आकार छोटा होता है या अनुपस्थित भी होता है जहाँ पर प्रोटीन्स संश्लेषण कम होता है। उदाहरण शुक्राणु कोशिका तथा पेशीय कोशिका में परन्तु न्यूरॉन्स, स्रावण कोशिकाओं तथा अण्डाणु कोशिका में इसका  आकार बड़ा अधिक होता है। जहाँ पर प्रोटीन संश्लेषण अधिक होता है

 
केन्द्रिका के कार्य 
(Function of Nucleolus)

केन्द्रिका के निम्नलिखित कार्य हैं.

(a) सूत्री विभाजन में सहायक (Helpful in Mitosis division) - केन्द्रिका सूत्री विभाजन में महत्वपूर्ण भाग लेती है।

(b) प्रोटीन संश्लेषण में सहायक (Helpful in Protein synthesis)- राइबोन्यूक्लिक न्यूक्लियाई अम्ल का निर्माण करके प्रोटीन संश्लेषण में मदद करते हैं।

(c) अनुवांशिक सूचनाओं के स्थानान्तरण में मध्यस्थ रूप में (As intermediator in the transmission of genetic information) - अनुवांशिक सूचनाओं के लिए मध्यस्थता का कार्य करती है तथा अनुवांशिक सूचनाओं को एकत्रित करके एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरित करती है।

केन्द्रक का रासायनिक संगठन
(Chemical Composition of Nucleus)

केन्द्रक रासायनिक रूप से न्यूक्लियो प्रोटीन्स के द्वारा निर्मित होता है अर्थात् इसमें न्यूक्लिक अम्ल तथा प्रोटीन्स मुख्य रूप से होता है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ एन्जाइम्स तथा कुछ अकार्बनिक लवण भी पाये जाते हैं।

(A) न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acid)- यह न्यूक्लियो प्रोटीन्स का मुख्य भाग है जो मुख्य रुप से DNA के रूप में पाया जाता है। न्यूक्लिक अम्ल केन्द्रक के शुष्क भार का लगभग 15 से 30% तक होता है। जबकि RNA की मात्रा अल्प होती है तथा केन्द्रक के कुल शुष्क भार का लगभग 1 से 2% तक होती है। न्यूक्लिक अम्ल (DNA तथा •RNA) प्रोटीन्स के साथ संयुक्त होकर डीआक्सीराइबोन्यूक्लियो प्रोटीन या राइबोन्यूक्लियो प्रोटीन का निर्माण करते हैं।

(B) प्रोटीन्स (Proteins) - केन्द्रक में प्रोटीन्स दो रूपों में पायी जाती है जिन्हें क्रमशः अम्लीय (acidic) या क्षारीय (Basic) प्रोटीन्स कहते हैं। क्षारीय प्रोटीन्स, अम्लीय प्रोटीन्स की तुलना में अधिक होती है तथा इनमें मुख्य रूप से हिस्टोन्स, न्यूक्लियो हिस्टोन्स तथा प्रोटैमाइन्स, न्यूक्ल्यिो प्रोटैमाइन्स, के रूप में पाया जाता है। केन्द्रिका में अम्लीय प्रोटीन्स ट्रिप्टोफैन (Trypotophan) तथा ट्राइरोसिन (Tyrosine) के रूप में होता है।

(C) एन्जाइम्स (Enzymes) - एन्जाइम्स केन्द्रक के प्रमुख तत्व होते हैं। डाइ फास्फोपाइरिडीन न्यूक्लियोटाइड सिन्थेटेज (Diphophopyridine nucleotide synthetase) एक प्रमुख केन्द्रकीय एन्जाइम है जो डाइफास्पोपाइरिडीन न्यूक्लियोटाइड (DPN) के संश्लेषण के लिये अनिवार्य होता है। इसके अतिरिक्त DNA पॉलीमेरेज तथा RNA पॉलीमेरेज प्रमुख एन्जाइम है जो m-RNA के द्वारा है तथा यह एन्जाइम DNA के संश्लेषण के लिए अनिवार्य होता है।

(D) अकार्बनिक तत्व (Inorganic Elements)- केन्द्रक में अकार्बनिक तत्व अल्प मात्रा में ही पाये जाते हैं किन्तु इनका जैवीय महत्व बहुत अधिक होता है। अकार्बनिक तत्व प्रमुख लवणों के रूप में पाये जाते हैं जिनमें से सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg), कैल्शियम (Ca), पोटेशियम (K), फास्फोरस (P), जिंक (Zn) तथा आयरन (Fe) प्रमुख अकार्बनिक तत्व हैं जो या तो प्रोटीन्स के साथ संयोग करते हैं अथवा एन्जाइम्स के साथ क्रिया करते हैं।

केन्द्रक के कार्य 
(Functions of Nucleus)
जर्मन जीव वैज्ञानिक जे. हैमरलिंग ने 1934 में बताया कि केन्द्रक एक महत्वपूर्ण कोशिकांग है जो समस्त जैवीय क्रियाओं को नियंत्रित करता है। अर्थात् कोष्ठिका के समस्त महत्वपूर्ण कार्य केन्द्रक के द्वारा सीधे ही नियंत्रित होते हैं। जिसे उन्होंने एक प्रयोग द्वारा सिद्ध कर दिया। इसके लिए उन्होंने हरे शैवाल ऐसिटाबुलेरिया की दो जातियों को लिया। A. Crenulata का केन्द्रक होने पर टोपी ऊंगली के समान होती है जबकि A. mediterravea में केन्द्रक होने पर टोपी छत्र के समान होती है। और दोनों केन्द्रकों की उपस्थिति होने पर टोपी की आकृति दोनों के बीच की अवस्था को प्रदर्शित करती है।

इस प्रयोग के द्वारा यह स्ष्ट होता है कि केन्द्रक का किसी भी जीव में विशेष जैवीय महत्व है। और यह जीव के लक्षणों को नियंत्रित करता है।


इन्हें भी देखें-



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